अपनों को छोड़ माननीय बनने की होड़, चुनाव से पहले पाला बदलने वालों में कई मंत्री, विधायक और एमएलसी शामिल

वाराणसी

विभिन्न दलों की एक विचारधारा होती है। पार्टी के नेता उस विचारधारा का पालन करने का दंभ भरते हैं। पार्टी की रीति-नीति का अनुपालन करते हुए वर्षों, दशकों तक दल से जुड़े रहते हैं। मगर सत्ता की ललक ऐसी कि वर्षों पुरानी पार्टी, उसकी विचारधारा, धर्म-ईमान को छोड़कर दूसरे दल में शामिल हो जाते थे। पाला बदल का यह खेल विशेष रूप से चुनाव से पहले देखने को मिलता है। चुनावों की घोषणा भले ही आठ जनवरी को हुई, पूर्वांचल में दल-बदल का यह खेल कई महीने से चल रहा है। परिणामस्वरूप कई छोटे-बड़े मंत्री, नेता, विधायक एक पार्टी से दूसरी में आते-जाते दिखते रहे। सपा और भाजपा में यह रोग सिर चढ़कर बोल रहा है। कई जिलों में इसका गहरा प्रभाव भी चुनाव में देखने को मिलेगा।

गाजीपुर में सैदपुर से विधायक सुभाष पासी ने सपा छोड़कर भाजपा का दामन थाम लिया है। सपा के पूर्व मंत्री विजय मिश्र जो बसपा में थे, अब भगवा का झंडा थाम लिया है। बसपा के दो बार विधायक कालीचरन राजभर भी भाजपा के हो चुके हैैं। सोनभद्र में सात बार के विधायक और पिछले चुनाव में बसपा के टिकट पर दुद्धी से चुनाव लड़े विजय सिंह गौड़ इस बार सपा से खम ठोकेंगे। दुद्धी से निर्दल विधायक रह चुकीं रूबी प्रसाद कई दलों से होते हुए छह माह पहले भाजपा में शामिल हो गईं हैं।

मीरजापुर से सपा के सांसद रहे बाल कुमार पटेल पार्टी छोड़कर कांग्रेस में गए थे लेकिन पुन: सपा में लौट आए। राजगढ़ से कांग्रेस के पूर्व विधायक और पूर्व मुख्यमंत्री स्वर्गीय कमलापति त्रिपाठी के नाती ललितेशपति त्रिपाठी तृणमूल कांग्रेस में चले गए हैैं। भदोही में कोई विशेष फेरबदल तो नहीं हुआ, लेकिन आगरा जेल में बंद निषाद पार्टी के चर्चित विधायक विजय मिश्र कब पाला बदल लेंगे कहा नहीं जा सकता।

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